संचालक के विचार

मनुष्य का सबसे प्रिय स्थान उसका घर होता है, क्योंकि घर मनुष्य का प्रथम मंदिर है जहां से वह अपने जीवन का आरंभ करता है और जीवन का शुरुआती ज्ञान ग्रहण करता है | इसी प्रकार से मनुष्य का दूसरा घर विद्यालय है विद्यालय अर्थात विद्या का मन्दिर । जहां मनुष्य सामाजिक, सांस्कृतिक और जीवन जीने की कला को सीखता है और इसी विद्या का उपयोग करके वह अपने जीवन को एक शिखर तक ले जाता है, साथ ही साथ अपने घर परिवार विद्यालय एवं देश का नाम दूर-दूर तक गौरवान्वित करता है |

अच्छी शिक्षा एवं अच्छा आचरण ही मनुष्य का सबसे शक्तिशाली औजार है। जिसकी मदद से मनुष्य अपने जीवन में प्रत्येक सफलताओं को हासिल करता है और अपने साथ-साथ अपने परिवार, समाज, विद्यालय एवं देश प्रदेश का नाम चारों तरफ फैलाता है |

जिस तरीके से एक कुम्हार मिट्टी को भांति-भांति के आकारों में पिरो देता है । उसी प्रकार विद्यालय बच्चों के जीवन को हौसले, आकांक्षाओं, सपनों एवं नई आशाओं से भर देता है और यही सब, हर एक विद्यार्थी के जीवन का आधार बनते हैं | जिनकी खोज करते हुए एक नन्हा बालक भविष्य में आगे चलकर एक महान कीर्तिमान स्थापित करता है और अपने बुद्धि विवेक एवं शिक्षा से दुनिया को एक नया आयाम देता है |

शिक्षा के महत्व को मैं जितना भी विस्तार करूं वह कम ही है | क्योंकि सीखने की एवं पढ़ने की कोई भी समय सीमा नहीं है और ना ही कोई उमर है | हम जन्म से मृत्यु तक निरंतर कुछ ना कुछ सीखते और समझते ही रहते हैं और जीवन के अंतिम पड़ाव में भी हम कुछ सीखते हुए ही अपने जीवन को समाप्त करते हैं |



श्री सुरेंद्र कुमार वर्मा

संचालक


डॉ.शोभाराम स्मारक इन्टर कॉलेज

विद्यालय बच्चों के जीवन को हौसले, आकांक्षाओं, सपनों एवं नई आशाओं से भर देता है और यही सब, हर एक विद्यार्थी के जीवन का आधार बनते हैं |

श्री सुरेंद्र कुमार वर्मा