प्रधानाचार्य के विचार

समय के साथ-साथ समाज में बहुत परिवर्तन आये है और मनुष्य ने अपने रहने और खाने के तरीके मेंं भी बहुत से परिवर्तन किये है| यही पहचान है बदलते समय और समय के साथ बदलती आवश्यकताओं और परिवेश की भी |

सामाजिक बदलाव और आधुनिक युग एक नियम के अधीन है - "आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है|" जैसी आवश्यकता की अनुभूति होती है वैसी ही नयी रचना का आविष्कार होता है | यही आवश्यकताएं ही आधुनिक युग की जननी है |

आवश्यकता को आविष्कार का रूप देने के लिए गहन अध्ययन और खोज की आवश्यकता होती है | यहीं से प्रारंभ होता है शिक्षा के महत्व और उसकी उपयोगिताओं का | शिक्षा केवल किताबों तक ही सीमित नहीं होती है इसका क्षेत्र असीमित है | इसी शिक्षा के माध्यम से ही आदि काल से आधुनिक काल का सफर तय हो सका है और आदि-मानव ने आवश्यकताओं के अनुसार से धीरे धीरे खुद में और अपने समाज में बदलाव करते हुए आज वही आदिमानव आधुनिक मानव में तब्दील हो चुका है|

शिक्षा का महत्व और उसकी उपयोगिता आदि काल से आधुनिक काल के इस समय काल से ही पूर्ण रूप से सिद्ध हो जाती है|

शिक्षा के इन्हीं बहुमूल्य उद्देश्यों को समझते हुए इसे एक नया आयाम और एक नई दिशा देने के लिए हमारा विद्यालय परिवार प्रति-पल तत्पर रहता है|



श्री रूद्र प्रताप सिंह

प्रधानाचार्य


डॉ.शोभाराम स्मारक इन्टर कॉलेज

सामाजिक बदलाव और आधुनिक युग एक नियम के अधीन है - "आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है|"

श्री रूद्र प्रताप सिंह